Tuesday, 8 November 2011

आस्था



     ’’देखो भाई , अब मै कुछ नहीं कर सकता। इतना समझाने के बाद भी जज के सामने तुम्हारे पिता जी के बयान ने सब गुड़ गोबर कर दिया।’’ वकील की बात सुन कर बूढ़े ने कहा-

     ’’ हाँ रे, मैं भगवत गीता छू कर कसम खाकर कैसे झूठ बोलता ? मेरा हाथ सड़ नहीं जाता ?              धर्म-कर्म से भी बड़ा कुछ होता है ?’’

     ’’ हाँ बाबु जी, उसके सब गवाह किस तरह गीता पर हाथ रख झूठ पर झूठ बोलते गये, उन सबके हाथ कहाँ सड़  गये ? आपका ही हाथ सड़ता ? अरे यह तो केवल अदालत का नियम है नहीं तो गीता छू कर बयान देने के बाद भी क्यों नाना प्रकार के साक्ष्य की आवष्यकता पड़ती ? अदालत में आपने वकील के बताये बात को ही कहना चाहिये।’’

     ’’ नहीं बेटा, चाहे कुछ भी हो मैं धार्मिक पूस्तक पर हाथ रख कर झूठ नहीं बोल सकता।’’ पिता की बात सुन कर बेटा ने अपने वकील से झल्ला कर कहा-’’ वकील साहब, आखिर यह ढकोसला क्यों ? क्यों सीधे-साधे लोगों के धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ किया जाता  है ? या तो धार्मिक किताब पर हाथ रख कर कही बात पर कोई जिरह न हो ,उसे ही सच मान लिया जाय ,वरना अदालत में यह ढकोसला बंद हो जाना चाहिये जिससे सीधे-साधे लोग सच बोल कर फंसते जाते हैं और चालाक-धूर्त्त लोग झूठ पर झूठ बोलकर बंचते जाते हैं ।’’

     ’’ यही सच और झूठ के ऊपर ही तो हम वकीलों की रोजी-रोटी  चल रही है। अरे तुम्हारे बातों से तो क्रांति की बू आती है।’’ वकील ने कहा।

मंदिर का चोर



     ’’कलुआ, तुम यह तो कहो कि अब तक जितनी बार तुम चोरी करते पकड़े गये हो हर बार किसी न किसी मंदिर में ही चोरी करते पाया गया है। इस बार भी तुम जैन मंदिर में सोना का कलश चोरी करते पकड़ा गया। आखिर तुम हर बार मंदिर में ही चोरी क्यों करते हो?’’

     जज ने उत्सुकता बस पुछा तो चोर ने गंभीर स्वर में कहा-

’’ मंदिर में सीधे-साधे लोगों से ठगी का धन जमा रहता है जिससे परखोक धर्माचारी लोग मौज करते हैं। नाना प्रकार के धार्मिक अंधविश्वास में फंस कर लोग दान-दक्षिणा देते हैं। मैं उसी धन से अपना हिस्सा वसूलता हूँ। देश के सभी मंदिरों में जमा धन सरकारी खजाने में जमा कर दिया जाय तो कितने ही बड़े-बड़े जनहित में कार्य हो सकते है। साथ ही साथ अंधविश्वासी लोगों को यह भी अहसास दिलाना चाहता हूँ,कि जो भगवान अपने घर (मंदिर) की रक्षा नहीं कर सकते वह दूसरे मनुष्यों की क्या रक्षा करेगा? इसलिये मेरे अनुसार मंदिर में चोरी करने में कोई बुराई नहीं है। मैं दूनिया के सब चोरों का आह्वान करते हूये कहना चाहता हूँ कि-
      ऐ चोर,चोरी करो मंदिर में,
 जहाँ घूसखोर भगवान।
   अमीर ही बढ़े गरीब ही मरे,
   पंडित मौज करे बेईमान ।।’’
चोर के मूह से यह धर्म की व्याख्या सुन सब चकित रह गये।