’’कलुआ, तुम यह तो कहो कि अब तक जितनी बार तुम चोरी करते पकड़े गये हो हर बार किसी न किसी मंदिर में ही चोरी करते पाया गया है। इस बार भी तुम जैन मंदिर में सोना का कलश चोरी करते पकड़ा गया। आखिर तुम हर बार मंदिर में ही चोरी क्यों करते हो?’’
जज ने उत्सुकता बस पुछा तो चोर ने गंभीर स्वर में कहा-
’’ मंदिर में सीधे-साधे लोगों से ठगी का धन जमा रहता है जिससे परखोक धर्माचारी लोग मौज करते हैं। नाना प्रकार के धार्मिक अंधविश्वास में फंस कर लोग दान-दक्षिणा देते हैं। मैं उसी धन से अपना हिस्सा वसूलता हूँ। देश के सभी मंदिरों में जमा धन सरकारी खजाने में जमा कर दिया जाय तो कितने ही बड़े-बड़े जनहित में कार्य हो सकते है। साथ ही साथ अंधविश्वासी लोगों को यह भी अहसास दिलाना चाहता हूँ,कि जो भगवान अपने घर (मंदिर) की रक्षा नहीं कर सकते वह दूसरे मनुष्यों की क्या रक्षा करेगा? इसलिये मेरे अनुसार मंदिर में चोरी करने में कोई बुराई नहीं है। मैं दूनिया के सब चोरों का आह्वान करते हूये कहना चाहता हूँ कि-
ऐ चोर,चोरी करो मंदिर में,
जहाँ घूसखोर भगवान।
अमीर ही बढ़े गरीब ही मरे,
पंडित मौज करे बेईमान ।।’’
चोर के मूह से यह धर्म की व्याख्या सुन सब चकित रह गये।
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