Monday, 11 June 2012

धर्मनिरपेक्षता का मतलब सिधे-सिधे ’धार्मिक वेश्यावृति’ कहना उचित होगा।


धर्मनिरपेक्षता का गलत मतलब लगाया जा रहा है भारत में। धर्मनिरपेक्ष का मतलब होता है धार्मिक मामलों में निरपेक्ष रहना मगर भारत में यह जिस तरह से इस्तेमाल हो रहा है इससे धर्मनिरपेक्षता का मतलब सिधे-सिधे ’धार्मिक वेश्यावृति’ कहना उचित होगा।

एक हिन्दु धर्म का साधारण आदमी मंदिर जायेगा, अपने ढंग से पूजा अर्चना करेगा। एक इस्लामिक मस्ज...िद जायेगा, नमाज पघ्ेगा, रोजा रखेगा और अपने ढंग से इबादत करेगा। एक ईसाइ चर्च जायेगा बाईबल के पद दुहरायेगा और इशु-मरियम के गुण गायेगा। इसी प्रकार सिख, बौद्ध, जैन और अन्य धर्मावलम्बि अपने पारंपरिक ढंग से पूजा अर्चना करते हैं। नास्तिक किसी भी धार्मिक समुदाय से आ सकता है। उसके बाहरी वेष-भूषा भौगौलिक और क्षेत्रीय संस्कार के चलते कुछ भिन्न हो सकते है पर नास्तिक तो नास्तिक ही होता है। नास्तिक का सिधा अर्थ है जिसमें धार्मिक अविश्वास हो, ईश्वर या परमात्मा जैसी किसी अलौकिक सत्ता पर आस्था न हो और कुछ नहीं। हाँ यहाँ धर्म का मतलब हिन्दु, इस्लाम आदि से ही लगाना। धर्म के कोई अन्य परिभाषा बता कर बरगलाने की चेष्टा न करना क्योंकि दुनिया के सारे लोग धर्म को इसी रूप में जानते हैं।

पर मैं देखता हूँ कि अपने को धर्मनिरपेक्ष साबित करने केलिये ’सर्वधर्म समभाव’ के रूप में अपना विशिष्ट ब्यवहार से अचंभित कर देते हैं, मैनें इसे ही धार्मिक वेश्यावृति की संज्ञा दी है। जिस प्रकार वेश्या एक पति के प्रति निष्ठावान न रह कर किसी भी मर्द के साथ सोने में नहीं हिचकती। उसी प्रकार जब कोई व्यक्ति अपने धर्म के अलावे दुसरे धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय हिस्सा लेता है। उसके कर्मकाण्ड में हिस्सा लेता है तो वह मेरी नजर में   धार्मिक वेश्या का उदाहरण है।

धार्मिक वेश्या का उदाहरण मेरे बिच नगर के एक चर्चित मित्र हैं जो रमजान में महिना भर रोजा रखते हैं, घर में छठ मैया की पूजा भी होती है और पूछे जाने पर वे अपना धर्म बौद्ध बताते।एक हिन्दु को मुसलमान का हित चिंतक होने केलिये गाय खाना जरूरी नहीं है न ही इफतार पाटी का आयोजन करना। मैने तो हिन्दु राजनेता को मुसलमानों के साथ इफतार पाटी में बजाप्ते नमाज पघ्ते देखा है। चद्द्र चघना और गुरू द्वारा में जाकर सर पर कपड़ा बांध माथा टेकना, बौद्धों के बिच जाकर ’धर्मचक्र’ घुमाना।

धार्मिक वेश्यावृति के सबसे अधिक शिकार हमारे राजनेता हैं जो कभी गुरू द्वारे में माथा टेकने चले जाते, वही मुसलमानों के पिर के मजार में चद्दर चघने चले जाते और उनके लिये इफतार पाटी का आयोजन करते। इस मामले में मैंने सुशील मोदी की प्रशंसा की थी जब उन्होंने मुस्लिम टोपी पहने से साफ इंकार कर दिया था। कई नेता तो वोट के चक्कर में गाय और सुअर एक साथ खा लेने में भी नहीं झिझकते!

अपने को मुसलमान, हिन्दु ईसाई या नास्तिक रखते हुये भी सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्र में मानवहित में काम किया जा सकता है। पर यहाँ धर्मनिरपेक्षता का मतलब सिधा-अर्थ धार्मिक वेश्यावृति को ही मान लिया गया है।

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