कभी कभी
बिक्षुब्ध हो जाता है मन तेरे लिये
कभी-कभी।
आन्दोलित हो उठता है दिल तेरे लिये
कभी-कभी,
हरदम रहता हूँ ख्यालों में तेरे ही,
पर तुफान मचा देता कोई ख्याल
कभी-कभी।
सदन है कि तुम मेरी नहीं हो,
किसी की हो,
भुल जाता यह बात
कभी-कभी।
तोड़ दूँ सारे बंधन को
चला जाऊँ ’उस पार’ मन करता
कभी-कभी।
भर आता है दिल
याद आती हो जब कभी
मचल उठता है दिल तुम्हें पाने को
कभी-कभी।
आँसू बहा लेता
या लिखता एक कविता
कभी-कभी।
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