नारी क्यों सजती हो?
ये मेक-अप, ये काजल
ये लिपिस्टीक और-
ये गोपन अंगों को
उभारने वाले कपड़ें-
क्यों पहनती हो?
पूरूष केलिये ही न?
व्यूटिपार्लर जाना
यह सजना और संवरना
किसके लिये?
पूरूष के लिये ही न?
भड़किला चटकिला देख
सिटी बजायी लड़के ने-
क्या बुरा किया?
सच तो यह है-
कि, तु खुश होती उस सिटी से,
जैसे हो गई सार्थक -
तुम्हारा व्यूटिपार्लर जाना।
हे नारी स्वतंत्रता के घोषक
नारी उत्श्रृंखलता के पोषक
तु पूरूषों से बराबरी की बात-
करती है तो तरस आती है।
जब तक उसके लिये
सजती रहेगी
उसे रिझाने का यत्न
करती रहेगी
इस तरह हे नारी
तु उत्श्रंृखल ही हो पायेगी
न स्वतंत्र हो पायेगी
न कर पायेगी बराबरी-
पूरूषों से।
हे नारी!
तु सजना छोड़
या सजना छोड़
क्यों कि-
सजना तो है सजने के लिये
सजना तो है सजने के लिये।।
ये मेक-अप, ये काजल
ये लिपिस्टीक और-
ये गोपन अंगों को
उभारने वाले कपड़ें-
क्यों पहनती हो?
पूरूष केलिये ही न?
व्यूटिपार्लर जाना
यह सजना और संवरना
किसके लिये?
पूरूष के लिये ही न?
भड़किला चटकिला देख
सिटी बजायी लड़के ने-
क्या बुरा किया?
सच तो यह है-
कि, तु खुश होती उस सिटी से,
जैसे हो गई सार्थक -
तुम्हारा व्यूटिपार्लर जाना।
हे नारी स्वतंत्रता के घोषक
नारी उत्श्रृंखलता के पोषक
तु पूरूषों से बराबरी की बात-
करती है तो तरस आती है।
जब तक उसके लिये
सजती रहेगी
उसे रिझाने का यत्न
करती रहेगी
इस तरह हे नारी
तु उत्श्रंृखल ही हो पायेगी
न स्वतंत्र हो पायेगी
न कर पायेगी बराबरी-
पूरूषों से।
हे नारी!
तु सजना छोड़
या सजना छोड़
क्यों कि-
सजना तो है सजने के लिये
सजना तो है सजने के लिये।।
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